फाइनेंस

इनकम टैक्स विभाग ने खड़े किए हाथ, नहीं कर पा रहा 2900000 करोड़ रुपये की वसूली

नई दिल्ली :- इनकम टैक्स विभाग को टैक्स वसूलने में मुश्किल आ रही है। संसद की फाइनेंस कमेटी ने इस बारे में चिंता जताई गई है। उन्होंने पूछा कि इस समस्या को कैसे सुलझाया जा सकता है। क्या टैक्स भरने पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जा सकती है? फाइनेंस कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई है।CBDT के चेयरमैन ने कमेटी को बताया कि बकाया टैक्स एक चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास लगभग 4300000 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स है, जो हमारे लिए चिंता का कारण है। यह एक पुरानी समस्या है। यह बकाया 90 के दशक के मध्य का भी है। पहले सब कुछ हाथ से रजिस्टर में लिखा जाता था।’ राजस्व सचिव ने कमेटी को बताया कि इसमें से बहुत सारा टैक्स ‘फर्जी’ भी है।

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कमेटी ने पाया कि डायरेक्ट टैक्स के मामले में 10,55,906 करोड़ रुपये का टैक्स पांच साल या उससे ज्यादा समय से बकाया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कमेटी को बताया गया है कि कुछ बकाया तो 1990 के दशक के मध्य के भी हैं।’
कमेटी ने यह भी देखा कि टैक्स अधिकारियों के अनुसार, 43,07,201 करोड़ रुपये के बकाया में से 28,95,851 करोड़ रुपये यानी 67 फीसदी वसूलना मुश्किल है। कमेटी को यह भी पता चला कि इस बकाया में बहुत सारा टैक्स फर्जी भी है। पहले, जब सब कुछ कंप्यूटर से नहीं होता था तो ब्याज का हिसाब नहीं रखा जाता था। अब कंप्यूटर हर साल ब्याज की गणना करता है।

क्यों है इस टैक्स को वसूलना मुश्किल?

रिपोर्ट में कहा गया है- इनकम टैक्स का जुर्माना बहुत ज्यादा होता है। हर साल देरी होने पर टैक्स बढ़ता रहता है, जिसे वसूलना मुश्किल होता है। कमेटी इस स्थिति को लेकर चिंतित है। उनका मानना है कि टैक्स वसूलने के तरीके को बदलने की जरूरत है। इसे और बेहतर बनाना होगा ताकि टैक्स आसानी से वसूला जा सके।
कमेटी का मानना है कि सही टैक्स तो सख्ती से वसूला जाना चाहिए। लेकिन,टैक्स अधिकारियों को यह भी देखना चाहिए कि कहीं किसी ईमानदार करदाता को गलत या ज्यादा टैक्स की मांग से परेशानी तो नहीं हो रही है।

कमेटी ने दिया सुझाव

कमेटी ने सुझाव दिया कि अब जब सारे टैक्स रेकॉर्ड कंप्यूटर में हैं तो कुछ बड़े कदम उठाने चाहिए। इसमें टैक्स को माफ करना या कुछ समय के लिए टैक्स भरने पर रोक लगाना शामिल है। इससे बकाया टैक्स को कम किया जा सकता है। कमेटी ने कहा कि यह काम जल्दी से जल्दी होना चाहिए।

Rohit

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